1. "ऋण की लागत" (Cost of Debt) आमतौर पर "इक्विटी की लागत" से कम क्यों होती है?
ऋणदाता शेयरधारकों की तुलना में अधिक जोखिम लेते हैं।
संपत्ति पर इक्विटी धारकों का निश्चित दावा होता है।
ऋण पर दिया गया ब्याज कर-कटौती योग्य है, जो एक टैक्स शील्ड बनाता है।
ऋण को चुकाने की आवश्यकता नहीं है।
Explanation:
ब्याज भुगतान कंपनी की कर योग्य आय को कम करता है, जिससे कर दर [Kd = I(1-t)] से ऋण की लागत प्रभावी रूप से कम हो जाती है। इक्विटी लाभांश का भुगतान कर-पश्चात लाभ से किया जाता है और कोई टैक्स शील्ड प्रदान नहीं करता है।
2. CAPM (पूंजी संपत्ति मूल्य निर्धारण मॉडल) में, "बीटा" (Beta) क्या मापता है?
कुल जोखिम।
जोखिम मुक्त दर।
अव्यवस्थित जोखिम (कंपनी विशिष्ट)।
बाजार के सापेक्ष व्यवस्थित जोखिम (बाजार जोखिम)।
Explanation:
बीटा इंगित करता है कि समग्र बाजार की तुलना में स्टॉक कितना अस्थिर है। बीटा > 1 का अर्थ है बाजार से अधिक अस्थिरता; बीटा < 1 का अर्थ है कम अस्थिरता।
3. "प्रतिधारित कमाई की लागत" (Cost of Retained Earnings) का अनुमान आमतौर पर क्या होता है?
नई इक्विटी की लागत से अधिक।
इक्विटी की लागत (Ke) के बराबर।
ऋण की लागत के बराबर।
शून्य।
Explanation:
प्रतिधारित कमाई में एक अवसर लागत शामिल होती है। शेयरधारक फर्म को पुनर्निवेश करने देने के लिए लाभांश छोड़ देते हैं। वे इक्विटी शेयरों (Ke) पर मांग के बराबर रिटर्न की उम्मीद करते हैं।
4. पूंजी का एक *अतिरिक्त* रुपया जुटाने की लागत को क्या कहा जाता है?
पूंजी की औसत लागत।
पूंजी की सीमांत लागत (Marginal Cost of Capital)।
डूबत लागत।
निश्चित लागत।
Explanation:
सीमांत लागत नई पूंजी की वृद्धिमान लागत है। यह नए निवेश प्रस्तावों के मूल्यांकन के लिए प्रासंगिक दर है।
5. WACC (पूंजी की भारित औसत लागत) की गणना के लिए सैद्धांतिक रूप से कौन से भार (Weights) बेहतर हैं?
बुक वैल्यू वेट्स।
ऐतिहासिक वेट्स।
मार्केट वैल्यू वेट्स।
सीमांत वेट्स।
Explanation:
बाजार मूल्य नियोजित पूंजी के वर्तमान आर्थिक मूल्य को दर्शाते हैं। बाजार मूल्य भार का उपयोग करना WACC को आज बाजार में नई पूंजी जुटाने की वास्तविक लागत के साथ संरेखित करता है।
6. CAPM के तहत इक्विटी की लागत (Ke) का सूत्र है:
(D1 / P0) + g
Rm + Beta(Rf)
Rf + Beta(Rm - Rf)
Rf - Beta(Rm - Rf)
Explanation:
Ke = जोखिम मुक्त दर + [बीटा * (बाजार रिटर्न - जोखिम मुक्त दर)]। यह स्टॉक की अस्थिरता के आधार पर सुरक्षित दर में जोखिम प्रीमियम जोड़ता है।
7. "वरीयता शेयर पूंजी की लागत" (Cost of Preference Share Capital) की गणना इस प्रकार की जाती है:
ब्याज / शुद्ध आय
वरीयता लाभांश * (1 - कर दर) / शुद्ध आय
वरीयता लाभांश / शुद्ध आय
वरीयता लाभांश / बाजार मूल्य
Explanation:
वरीयता लाभांश कर-कटौती योग्य नहीं हैं, इसलिए कोई कर समायोजन नहीं किया जाता है। लागत = Dp / NP।
8. "फ्लोटेशन लागत" (Floatation Costs) नई इक्विटी की लागत को कैसे प्रभावित करती है?
वे इक्विटी की लागत को बढ़ाते हैं।
वे लाभांश भुगतान को कम करते हैं।
वे इक्विटी की लागत को कम करते हैं।
उनका कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
Explanation:
फ्लोटेशन लागत (जारी करने के खर्च) "शुद्ध आय" को कम करती है जो कंपनी को निर्गम से प्राप्त होती है। चूंकि हर (शुद्ध आय) घटता है, परिकलित पूंजी की लागत बढ़ जाती है।
9. निम्नलिखित में से कौन पूंजी संपत्ति मूल्य निर्धारण मॉडल (CAPM) की धारणा नहीं है?
निवेशक विविध पोर्टफोलियो रखते हैं।
बाजार परिपूर्ण हैं (कोई कर नहीं, कोई लेनदेन लागत नहीं)।
भविष्य के रिटर्न के बारे में सभी निवेशकों की अलग-अलग उम्मीदें हैं।
निवेशक तर्कसंगत और जोखिम-प्रतिकूल हैं।
Explanation:
CAPM "सजातीय अपेक्षाओं" को मानता है - कि सभी निवेशकों के पास अपेक्षित रिटर्न, भिन्नता और सहसंबंधों के बारे में समान अपेक्षाएं हैं।
10. प्रतिधारित कमाई (Retained Earnings) की "निहित लागत" (Implicit Cost) होती है क्योंकि:
कंपनी इस पर ब्याज देती है।
यह मुफ़्त पैसा है।
यह किताबों में दर्ज है।
शेयरधारक लाभांश को कहीं और निवेश करने के अवसर को छोड़ देते हैं।
Explanation:
स्पष्ट लागतों में नकद बहिर्वाह (ब्याज) शामिल है। निहित लागतें अवसर लागतें हैं। प्रतिधारित कमाई की लागत वह रिटर्न है जो शेयरधारक कमा सकते थे यदि पैसा वितरित किया गया होता।
11. "मोचन योग्य ऋण की लागत" (Cost of Redeemable Debt) की गणना करते समय, किस कारक पर विचार नहीं किया जाता है?
ब्याज दर।
मोचन मूल्य और परिपक्वता अवधि।
लाभांश भुगतान अनुपात।
कर दर।
Explanation:
ऋण की लागत ब्याज, टैक्स शील्ड और मोचन शर्तों (छूट/प्रीमियम) पर निर्भर करती है। लाभांश भुगतान अनुपात इक्विटी की लागत के लिए प्रासंगिक है, ऋण के लिए नहीं।
12. "पूंजी की सीमांत लागत" (MCC) अनुसूची ऊपर की ओर कूदती (टूटती) है जब:
जुटाए गए नई पूंजी की मात्रा एक सस्ते स्रोत (जैसे प्रतिधारित कमाई) को समाप्त कर देती है और एक अधिक महंगे स्रोत (जैसे नई इक्विटी) की आवश्यकता होती है।
कर की दरें गिरती हैं।
ब्याज दरें गिरती हैं।
फर्म के पास अतिरिक्त नकदी है।
Explanation:
इस बिंदु को "ब्रेक पॉइंट" कहा जाता है। एक बार जब प्रतिधारित कमाई का उपयोग हो जाता है, तो फर्म को नए शेयर जारी करने होंगे (फ्लोटेशन लागत वहन करना), जिससे WACC बढ़ जाता है।
13. सिक्योरिटी मार्केट लाइन (SML) ग्राफ में, यदि कोई स्टॉक SML लाइन के ऊपर स्थित है, तो उसे माना जाता है:
ओवरवैल्यूड (अधिक मूल्यवान)।
उच्च जोखिम।
अंडरवैल्यूड (कम मूल्यवान)।
सही मूल्यवान।
Explanation:
यदि कोई स्टॉक SML से ऊपर है, तो वह अपने जोखिम के स्तर के लिए CAPM की भविष्यवाणी से अधिक अपेक्षित रिटर्न दे रहा है। इसलिए, यह आकर्षक/कम मूल्यवान है और इसे खरीदा जाना चाहिए।